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हृदय रोग के प्रभाव

हृदय रोग के प्रभाव

यह दिल और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे दिल का दौरा, लकवा और दिल की कमजोरी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

  • सीने में दर्द (एनजाइना) – दिल तक रक्त प्रवाह कम होने के कारण।
  • दिल का दौरा – जब दिल को रक्त की आपूर्ति रुक जाती है।
  • दिल की कमजोरी – जब दिल ठीक से रक्त पंप नहीं कर पाता।
  • लकवा (स्ट्रोक) – जब दिमाग तक रक्त प्रवाह रुक जाता है।
  • किडनी को नुकसान – किडनी तक रक्त प्रवाह कम होने के कारण।

 दवा का सही सेवन और खुद जांच

दवा का सही सेवन और खुद जांच
  • डिस्लिपिडेमिया वाले कई मरीज़ों को जीवनशैली में बदलाव के साथ-साथ स्टैटिन या अन्य लिपिड कम करने वाली दवाओं की ज़रूरत होती है।
  • हर दिन दवा ली या नहीं, यह जांचने के लिए पिलबॉक्स, मोबाइल रिमाइंडर, या कैलेंडर पर निशान लगाने का इस्तेमाल करें।
  • आम साइड इफेक्ट (जैसे मांसपेशियों में दर्द, पेट में गड़बड़ी) पर ध्यान दें, और खुद से दवा बंद करने की बजाय डॉक्टर को बताएं।

शारीरिक गतिविधि की निगरानी

शारीरिक गतिविधि की निगरानी
  • हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर की एरोबिक गतिविधि करें (जैसे तेज़ चलना), साथ ही हफ्ते में 2 या ज़्यादा दिन मांसपेशियां मज़बूत करने वाली एक्सरसाइज़ करें।
  • रोज़ाना कदमों को गिनने के लिए स्टेप काउंटर या फोन ऐप का इस्तेमाल करें; धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें।
  • अपनी ऊर्जा का स्तर, सांस फूलना, और कोई भी सीने का दर्द नोट करें; अगर कोई असामान्य लक्षण दिखे तो रुककर मदद लें।

 खान-पान की निगरानी

खान-पान की निगरानी
  • फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और स्वस्थ तेल जैसे दिल के लिए अच्छे खान-पान का पैटर्न अपनाएं (जैसे मेडिटेरेनियन या डैश डाइट)।
  • सैचुरेटेड और ट्रांस फैट, तली-भुनी चीज़ें, ज़्यादा चीनी वाले नाश्ते, और मीठे पेय पदार्थ कम करें, ताकि एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड कम हो।
  • अपने खान-पान पर ईमानदारी से नज़र रखने के लिए एक सरल फूड डायरी रखें या फोन में फोटो लें।

लैब जांच

लैब जांच
  • लिपिड प्रोफाइल में कुल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल-सी, एचडीएल-सी और ट्राइग्लिसराइड शामिल होते हैं।
  • इलाज शुरू करने या बदलने के बाद, आमतौर पर 4-12 हफ्तों में दोबारा जांच होती है, फिर जोखिम और नियंत्रण के अनुसार हर 3-12 महीने में।
  • हमेशा अपने डॉक्टर द्वारा बताए गए जांच शेड्यूल का पालन करें, क्योंकि ज़्यादा जोखिम वाले मरीज़ों को बार-बार जांच की ज़रूरत हो सकती है।

 घर पर क्या जांचें?

घर पर क्या जांचें?
  • जीवनशैली डायरी: dरोज़ाना भोजन, शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान/शराब और नींद का रिकॉर्ड रखें।
  • वज़न और कमर का घेरा: हर हफ्ते नापें ताकि बदलाव पता चले; सिर्फ 5-10% वज़न कम करने से भी लिपिड बेहतर हो सकता है।
  • ब्लड प्रेशर: अगर आपको उच्च रक्तचाप या दिल की बीमारी का ज़्यादा खतरा है, तो निगरानी करें।
  • दवा का सेवन: कब ली, कोई खुराक छूटी, या कोई साइड इफेक्ट हुआ तो नोट करें।

हृदय रोग के प्रकार

हृदय रोग के प्रकार

यह ऐसी बीमारियों को कहते हैं जो दिल और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती हैं और शरीर में सामान्य रक्त प्रवाह को बाधित करती हैं। इसमें कई तरह की बीमारियाँ शामिल हैं:

  • कोरोनरी धमनी रोग (CAD)
  • दिल का दौरा (हार्ट अटैक)
  • लकवा (स्ट्रोक)
  • उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर)

खुद निगरानी क्यों जरूरी है

खुद निगरानी क्यों जरूरी है
  • लिपिड (चर्बी) की समस्याओं के आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखते, जब तक हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर घटना न हो जाए।
  • लिपिड, वज़न, ब्लड प्रेशर और जीवनशैली की नियमित जांच से आप और आपके डॉक्टर समय रहते इलाज में बदलाव कर सकते हैं।
  • मरीज़ पर केंद्रित शिक्षा और खुद निगरानी से खान-पान, दवाइयों और फॉलो-अप विज़िट का पालन बेहतर होता है।

डिस्लिपिडेमिया क्या है?

डिस्लिपिडेमिया क्या है?
  • यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें खून में कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड का स्तर बहुत ज़्यादा, बहुत कम, या असंतुलित हो जाता है।
  • आम पैटर्न: ज़्यादा एलडीएल (“खराब” कोलेस्ट्रॉल), कम एचडीएल (“अच्छा” कोलेस्ट्रॉल), और ज़्यादा ट्राइग्लिसराइड।
  • ये बदलाव धीरे-धीरे धमनियों को नुकसान पहुंचाते हैं और दिल की बीमारी (एएससीवीडी) का खतरा बढ़ाते हैं।

हृदय रोग क्या है?

हृदय रोग क्या है?

हृदय रोग वे बीमारियाँ हैं जो दिल या रक्त वाहिकाओं के ठीक से काम न करने के कारण होती हैं। कोरोनरी हृदय रोग में दिल की मांसपेशियों को रक्त पहुँचाने वाली नसें प्रभावित होती हैं।

  • एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों का सख्त होना): इसमें चर्बी, कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम जैसे पदार्थ धमनियों की दीवार में जमा होकर परत बना लेते हैं। इससे धमनियाँ सिकुड़ जाती हैं और सख्त हो जाती हैं, जिससे अंगों तक रक्त का प्रवाह कम हो जाता है।
  • एनजाइना: जब दिल की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं मिलता, तो सीने में दर्द या बेचैनी होती है।
  • सेरेब्रोवास्कुलर रोग: यह दिमाग को रक्त पहुँचाने वाली नसों से जुड़ी बीमारी है।

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